कानपुर के चर्चित करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मनोचा (63) हत्याकांड में एक बड़ा और चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस जांच और कड़ाई से पूछताछ के बाद यह साफ हो गया है कि हत्या का असली मास्टरमाइंड मृतक का अपना बेटा सुब्रत (35) ही है। शुरुआत में साजिश के आरोप में जेल भेजी गई बहू शालू (32) पूरी तरह बेगुनाह निकली है। पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल के अनुसार, बहु की रिहाई के लिए पुलिस जल्द ही कोर्ट में अर्जी दाखिल करेगी।
आखिर पुलिस को कैसे हुआ सुब्रत पर शक?
मामले की शुरुआती जांच में पुलिस को सुब्रत के बर्ताव और घटनाक्रम की कई कड़ियों पर गहरा शक हुआ:
- नौकर को पहचानने से इनकार करना: वारदात के शुरुआती दिनों में जब पुलिस ने विशाल को पकड़ा, तो सुब्रत ने पुलिस के सामने विशाल को पहचानने से साफ मना कर दिया था।
- पत्नी की गिरफ्तारी पर बेरुखी: जब पुलिस ने साजिश के आरोप में सुब्रत की पत्नी शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, तो सुब्रत के चेहरे या व्यवहार में कोई फर्क नहीं पड़ा, जिससे पुलिस का शक गहरा गया।
- डुप्लीकेट नहीं, ओरिजिनल चाबी से खुला था दरवाजा: शुरुआत में 100 रुपये में बनाई गई डुप्लीकेट चाबी से फ्लैट खोलने की बात सामने आई थी, लेकिन गहन जांच में पता चला कि हत्या के दौरान फ्लैट का दरवाजा ओरिजिनल चाबी से ही खोला गया था।
- विशाल और सुब्रत की नजदीकी का सच: पूछताछ के दौरान नौकर विशाल ने कबूला कि वह किसी और का नहीं, बल्कि सुब्रत का ही सबसे खास और करीबी आदमी था, जिसके कहने पर उसने पूरा ड्रामा रचा था।
19 दिन बाद ऐसे खुला राज
दवा कारोबारी विनीत मनोचा हत्याकांड में पुलिस 19 दिनों तक तहकीकात में लगी रही। 6 सितंबर को पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान नौकर विशाल और उसके साथी राजकिशोर को पैर में गोली मारकर पकड़ा था। उस समय आरोपियों ने झूठा बयान देकर साजिश का ठीकरा बहू शालू पर फोड़ दिया था, जिसके आधार पर पुलिस ने शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
हालांकि, बुधवार (23 सितंबर) को जब पुलिस ने शालू, विशाल और राजकिशोर को 24 घंटे की रिमांड पर लेकर कल्याणपुर थाने में आमना-सामना कराया, तो पूरा केस पलट गया। रिमांड के दौरान नौकर विशाल ने कबूला कि उसने सुब्रत के कहने पर ही हत्या की थी और सुब्रत ने उसे हिदायत दी थी कि पकड़े जाने पर शालू का नाम ले ले। इसके बदले सुब्रत ने नौकर को 6 लाख रुपये देने का वादा किया था। देर रात करीब 2:30 बजे जब पुलिस ने सुब्रत से कड़ाई से पूछताछ की, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।
कर्ज, महंगे शौक और पारिवारिक अनबन बनी हत्या की वजह
पुलिस कमिश्नर के अनुसार, आरोपी बेटा सुब्रत शराब, जुआ और सट्टेबाजी का लती था। महंगे शौक और स्टेटस सिंबल बनाए रखने के चक्कर में उस पर विभिन्न बैंकों (ICICI, RBL, PNB, मनीव्यू आदि) और क्रेडिट कार्ड का करीब 40 लाख रुपये का भारी कर्ज हो चुका था। उसे हर महीने 55 हजार रुपये की किस्त भरनी पड़ती थी, जबकि उसके पिता उसे सिर्फ 40 हजार रुपये पॉकेट खर्च देते थे। कर्ज चुकाने के लिए उसने अपने नौकर विशाल के साथ मिलकर बिरहाना रोड स्थित पिता की दुकान से 8-9 बार दवाइयां भी चोरी करवाई थीं।
इसके अलावा, आरोपी ने पिता पर कई महिलाओं से संबंध होने और मां के साथ बदसलूकी करने के आरोप लगाए। सुब्रत को डर था कि उसके पिता किसी अन्य महिला से शादी कर लेंगे, जिससे जायदाद का बंटवारा हो जाएगा और वह एक-एक रुपये का मोहताज हो जाएगा।
पत्नी को क्यों फंसाया?
सुब्रत ने पूछताछ में बताया कि उसकी पत्नी शालू की अक्सर नौकर विशाल से बातचीत होती रहती थी और विशाल घर आता-जाता था। इसलिए उसने विशाल को निर्देश दिया था कि अगर पुलिस पकड़े तो शालू का नाम ले ले ताकि जांच की दिशा भटक जाए। शालू को फंसाने के लिए उसने खुद विशाल से नया सिम खरीदवाकर शालू को उसका नंबर दिया था।
शालू की गिरफ्तारी के बाद आरोपी सुब्रत गिल्ट और डर के कारण लगातार नींद की गोलियां खा रहा था और पुलिस की गिरफ्त में न आने पर आत्महत्या करने की फिराक में था।
3 महीने से रची जा रही थी साजिश
सुब्रत पिछले 3 महीनों से पिता की हत्या की प्लानिंग कर रहा था। पहले उसने एक्सीडेंट कराने की कोशिश की, फिर तकिये से मुंह दबाकर हत्या करने का प्लान बनाया, ताकि इसे ‘हार्ट अटैक’ का रूप दिया जा सके। घटना वाले दिन सुब्रत अपनी पत्नी और बेटे को लेकर पार्टी में चला गया और घर के CCTV कैमरे बंद कर दिए।
योजना के तहत नौकर विशाल और राजकिशोर घर के फ्लैट में पहले से छिप गए। लेकिन जब विनीत मनोचा कमरे में आए और लाइट जला दी, तो उन्होंने चोरों को देखकर शोर मचाना शुरू कर दिया। घबराहट में विशाल ने चाकू से गोदकर उनकी हत्या कर दी, जिससे तकिये से सांस घोंटने की मूल योजना फेल हो गई।
पुलिस अब बेगुनाह बहू शालू को कानूनी प्रक्रिया के तहत रिहा कराने और मास्टरमाइंड बेटे सुब्रत को सख्त सजा दिलाने की कार्रवाई में जुट गई है।







