रिपोर्ट – विवेक त्रिवेदी
कानपुर देहात। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 भले ही अभी दूर हों, लेकिन राजनीतिक दलों ने अपनी-अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। कानपुर देहात की अकबरपुर रनियां विधानसभा सीट पर बहुजन समाज पार्टी ने बड़ा राजनीतिक दांव चलते हुए अपने प्रत्याशी के नाम का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि जितेंद्र सिंह गुड्डन को मैदान में उतारकर चुनावी मुकाबले को दिलचस्प बना दिया है।
अकबरपुर स्थित सिंह लॉन में आयोजित बहुजन समाज पार्टी के विधानसभा स्तरीय कार्यकर्ता सम्मेलन में उस समय कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया, जब मुख्य अतिथि एवं मुख्य मंडल प्रभारी नौशाद अली ने मंच से घोषणा करते हुए कहा कि बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के निर्देश पर अकबरपुर रनियां विधानसभा सीट से जितेंद्र सिंह गुड्डन पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी घोषित कर दिया।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि सभी लोग पूरी ताकत के साथ चुनावी तैयारी में जुट जाएं और प्रदेश में बसपा की सरकार बनाने के लिए एकजुट होकर काम करें।
जितेंद्र सिंह गुड्डन हाल ही में भारतीय जनता पार्टी छोड़कर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए हैं। इसके बाद से ही उनके चुनाव लड़ने की चर्चाएं तेज थीं, जिन पर अब पार्टी ने आधिकारिक मुहर लगा दी है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह घोषणा भाजपा के लिए बड़े झटके के रूप में देखी जा रही है, क्योंकि जितेंद्र सिंह गुड्डन को अकबरपुर के सांसद देवेंद्र सिंह भोले का बेहद करीबी माना जाता रहा है। हालांकि उनका राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ाव से गुजरा है। निकाय चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा छोड़ समाजवादी पार्टी का दामन थामा था, जहां उनकी पत्नी दीपाली सिंह को नगर पंचायत अध्यक्ष का टिकट मिला और जीत के बाद वह फिर भाजपा में लौट आए। लेकिन अब एक बार फिर उन्होंने भाजपा से दूरी बनाकर बसपा का हाथ थाम लिया है।
बसपा द्वारा प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद अकबरपुर रनियां विधानसभा की सियासत में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अन्य राजनीतिक दल इस सीट पर किसे मैदान में उतारते हैं और चुनावी मुकाबला किस दिशा में आगे बढ़ता है।
फिलहाल, बसपा ने अकबरपुर रनियां से अपने पत्ते खोल दिए हैं। ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इस सीट का राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलता दिखाई दे रहा है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में बाकी दल क्या रणनीति अपनाते हैं।







