देवरिया। ओमान तट के निकट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में एक व्यावसायिक पोत पर हुए हमले में देवरिया जिले के एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही सुरौली गांव में मातम छा गया। घर में चीख-पुकार मची है, पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल है, जबकि दो मासूम बच्चे अपने पिता को याद कर बिलख रहे हैं। गांव में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का दर्द देखकर हर किसी की आंखें नम हो रही हैं।
सुरौली थाना क्षेत्र के सुरौली गांव निवासी शिवानंद चौरसिया सिंगापुर की एक शिपिंग कंपनी के व्यावसायिक पोत पर वेल्डर के पद पर कार्यरत थे। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने और कर्ज का बोझ कम करने के लिए वह करीब सात माह पहले रोजगार के लिए विदेश गए थे। बताया जा रहा है कि जिस पोत पर वह तैनात थे, वह होर्मुज क्षेत्र से गुजर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ। इस घटना में शिवानंद की मौत हो गई।
परिवार को हादसे की जानकारी सबसे पहले दुबई में कार्यरत उनके छोटे भाई रामप्रवेश चौरसिया से मिली। गुरुवार सुबह फोन पर मिली इस सूचना ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। बाद में जिला प्रशासन ने भी घटना की पुष्टि की।
शिवानंद की पत्नी सुशीला चौरसिया पति की मौत की खबर सुनते ही बेसुध हो गईं। पांच वर्षीय पुत्र राजवीर और दो वर्षीय पुत्री वानिका अभी यह भी नहीं समझ पा रहे हैं कि उनके सिर से पिता का साया उठ चुका है। शिवानंद परिवार के बड़े बेटे थे। उनके परिवार में पिता रामजी चौरसिया, माता कलावती देवी, पत्नी और दो छोटे बच्चे हैं। बेटे की मौत की खबर से माता-पिता भी गहरे सदमे में हैं।
घटना की सूचना मिलते ही गांव और आसपास के क्षेत्रों के लोग बड़ी संख्या में उनके घर पहुंचने लगे। ग्रामीणों ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए सरकार से आर्थिक सहायता और परिवार के पुनर्वास की मांग की है। लोगों का कहना है कि परिवार की पूरी जिम्मेदारी अब सरकार को उठानी चाहिए।
मामले की जानकारी मिलते ही तहसील और जिला प्रशासन के अधिकारी भी गांव पहुंचे। अधिकारियों ने परिजनों को हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने बताया कि शासन स्तर पर संपर्क स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है तथा परिवार को नियमानुसार हर संभव मदद उपलब्ध कराई जाएगी।
शिवानंद की मौत से पूरे गांव में शोक का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि मेहनत-मजदूरी कर परिवार का भविष्य संवारने निकला बेटा अब कभी वापस नहीं लौटेगा। गांव के लोग परिवार के दुख में शामिल हैं और सरकार से पीड़ित परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता देने की मांग कर रहे हैं।








