दिल्ली। केंद्र सरकार में बड़ा प्रशासनिक बदलाव करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। उनके इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को सौंपा गया है। प्रह्लाद जोशी पहले से ही उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय का दायित्व संभाल रहे हैं। अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी दी गई है।
प्रह्लाद जोशी भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में गिने जाते हैं और संगठन से लेकर सरकार तक लंबा अनुभव रखते हैं। दो दशक से अधिक समय से सक्रिय राजनीति में रहने वाले जोशी अपनी संगठनात्मक क्षमता, प्रशासनिक अनुभव और संसदीय सक्रियता के लिए जाने जाते हैं। लगातार कई बार लोकसभा चुनाव जीतने और विभिन्न मंत्रालयों का सफल संचालन करने के कारण पार्टी नेतृत्व ने उन पर एक बार फिर बड़ा भरोसा जताया है।
कर्नाटक के विजयपुर (बीजापुर) में 27 नवंबर 1962 को जन्मे प्रह्लाद जोशी ने हुबली में शिक्षा प्राप्त की और स्नातक की डिग्री हासिल की। युवावस्था से ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े रहे, जिससे उनकी संगठनात्मक समझ और नेतृत्व क्षमता मजबूत हुई। 1990 के दशक में हुबली के ईदगाह मैदान में तिरंगा फहराने के आंदोलन सहित कई जन अभियानों में उनकी सक्रिय भूमिका रही। इसके बाद वे कर्नाटक भाजपा के प्रमुख नेताओं में शामिल हो गए।
उनकी राजनीतिक यात्रा भाजपा के जिला संगठन से शुरू हुई। धारवाड़ जिले में संगठन को मजबूत करने के बाद उन्होंने वर्ष 2004 में पहली बार धारवाड़ लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद में प्रवेश किया। इसके बाद 2009, 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में लगातार जीत दर्ज कर उन्होंने इस सीट पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखी। लगातार पांच बार सांसद चुने जाने के कारण उनकी पहचान कर्नाटक के प्रभावशाली भाजपा नेताओं में होती है।
वर्ष 2012 में उन्हें कर्नाटक भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। उनके नेतृत्व में पार्टी ने राज्य में संगठन विस्तार पर विशेष ध्यान दिया। इसके बाद केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में उन्हें संसदीय कार्य, कोयला एवं खान मंत्रालय जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गईं। इन मंत्रालयों में उन्होंने संसदीय कार्यों के संचालन, कोयला उत्पादन बढ़ाने और खनन क्षेत्र से जुड़े कई अहम निर्णयों पर काम किया।
2024 में तीसरी बार मोदी सरकार बनने के बाद उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। अब शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिलने के साथ उनकी जिम्मेदारियां और बढ़ गई हैं।
शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद प्रह्लाद जोशी के सामने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन, उच्च शिक्षा संस्थानों में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाने, डिजिटल शिक्षा को मजबूत करने और शिक्षा क्षेत्र में चल रही विभिन्न योजनाओं को गति देने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी। माना जा रहा है कि सरकार ने उनके लंबे राजनीतिक अनुभव, संगठनात्मक क्षमता और प्रशासनिक दक्षता को देखते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है।












