देश – भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में हर दिन नए तथ्य सामने आने के साथ कई सवाल भी खड़े हो रहे हैं। एक तरफ प्रशासन पुलिस कार्रवाई को सही बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ परिवार और विपक्ष इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठा रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर पुलिस कार्रवाई पूरी तरह नियमों के तहत हुई थी, तो फिर न्यायिक जांच की जरूरत क्यों पड़ी? वहीं यदि जांच कराई जा रही है तो क्या शुरुआती दावों में कहीं कोई कमी थी?
परिवार लगातार कह रहा है कि उन्हें घटना की निष्पक्ष जांच चाहिए और पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आनी चाहिए। दूसरी ओर पुलिस की ओर से परिवार और प्रदर्शन में शामिल लोगों पर दर्ज एफआईआर ने मामले को और चर्चा में ला दिया है।
अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी? क्या न्यायिक जांच के बाद पूरे घटनाक्रम की तस्वीर बदल सकती है?
राजनीतिक बयानबाजी के बीच अब लोगों की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि मामला सिर्फ पुलिस कार्रवाई तक सीमित रहता है या फिर इससे जुड़े अन्य पहलू भी सामने आते हैं।












